दिल्ली दूर ही अब। जीन्स टी शर्ट में खुद को बादशाह तुगलक समझने का भ्रम भी टूट गया और उन मॉल्स, बिग बाजारों से मोह भी भंग हो गया। मकान मालिक ही शहंशाह है, अब लगा सच्चू को, तो आना पड़ा अपने ही गाँव, उस शाही राजधानी को छोड़कर।
घर आया तो टी शर्ट के कॉलर नीचे थे। उस गांव, खोलों, धारों, खेतों पर असीम प्यार उमड़ घुमड़ रहा था उसके सीने में। 14 दिन प्राइमरी स्कूल में रहा, पर वह 14 दिन उसे उस दिल्ली की मायावी दुनिया से ज्यादा सुकून भरे लगे।
घर पहुँचा तो समस्याएँ जस की तस थीं। पिताजी बीमार, बहन बिमुली की सगाई तो हो गई थी पर शादी कैसे हो, माँ किस तरह घर के खर्चे उठाये?
वह बड़ी मुश्किल से निकला था लॉकडाउन से और किसी तरह घर पहुँचा था। मिठाई की दुकान में ही तो था, कितने रुपये ला पाया होगा। गाँव में बहुत से लोग पहले ही आ गये थे, उनके पास रुपये थे तो ठहाके लगा रहे थे हर खोलों में। उसकी शादी की बात भी कई जगह इस वजह से चल रही थी कि सच्चू दिल्ली में जॉब करता है।
राजनैतिक वायदों के बजाय उसने बचपन याद किया। पिताजी ही तो उसके बाल काटते थे बचपन में, वह क्यों लोगों के बाल नहीं काट सकता? उसे बचपन से ही लिंगड़े बहुत पसंद हैं, तो वह लोग जो गाँव आ गये हैं , उन्हें पसंद नहीं होंगे क्या?
तो सैलून खोल लिया उसने गाँव में ही, एक सब्जी की दुकान भी। 10 लोग बाल कटवाने आये पहले दिन, सब्जी लेने भी आये कई लोग। 400 रुपये की कमाई हुई।
@ Jitendra Rai "Jeet"
लघु कथा ’सच्चू गाँव लौट आया’
लेखक परिचय
नाम- जितेन्द्र राय 'जीत’
शैक्षिक योग्यता- एम. ए. ( अंग्रेजी), बी़ एड.
जन्मतिथि- 06 अप्रैल 1981
कवि एवं लेखक
जिला अध्यक्ष
हिन्दी साहित्य भारती
चम्पावत।
मूलनिवास का पता-
ग्राम- बजवाड़,
विकास खण्ड- पाबौ
जिला- पौड़ी गढ़वाल
उत्तराखण्ड
पिन- 246123
मोबाइल नम्बर- 8006551851
9528475725
वर्तमान में राजकीय सेवा में चम्पावत, उत्तराखंड में कर्मरत।

सकारात्मक संदेश देती सुंदर लघुकथा।
ReplyDeleteहार्दिक आभार,धन्यवाद जखमोला जी।
ReplyDelete🌻🙏🌻
ReplyDeleteहार्दिक आभार। अभिवादन।
Deleteबहुत सुंदर
ReplyDeleteआशुतोष पांडेय
सुंदर कहानी
ReplyDeleteहार्दिक धन्यवाद, आभार रावत जी।
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